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इंजेकà¥à¤¶à¤¨ के पà¥à¤°à¤•ार :-
इंटà¥à¤°à¤¾à¤µà¥€à¤¨à¤¸ इंजेकà¥à¤¶à¤¨ (Intravenous injections)
ये इंजेकà¥à¤¶à¤¨ सीधे नसों या वेंस में डाले जाते हैं जिससे दवा जलà¥à¤¦à¥€ खून में मिल जाà¤. à¤à¤¸à¥‡ इंजेकà¥à¤¶à¤¨ से उन दवाओं को दिया जाता है जिनकी जरूरत तà¥à¤‚रत पड़ती है. मॉरà¥à¤«à¥€à¤¨ जैसे पेन किलर, à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ या फिर à¤à¤‚टी फंगल à¤à¤œà¥‡à¤‚टà¥à¤¸ को इस तरह के इंजेकà¥à¤¶à¤¨ से दिया जाता है.
इंटà¥à¤°à¤¾à¤®à¤¸à¥à¤•à¥à¤¯à¥à¤²à¤° इंजेकà¥à¤¶à¤¨ (Intramuscular injections)
इस इंजेकà¥à¤¶à¤¨ से मांसपेशियों में दवा पहà¥à¤‚चाई जाती है. कोविड-19 वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ इसी इंजेकà¥à¤¶à¤¨ का à¤à¤• उदाहरण है. मांसपेशियों में खून लगातार और तेज धार में बहता रहता है. à¤à¤¸à¥‡ में इसमें दवा डालकर उसे सà¥à¤¥à¤¿à¤° गति से पूरे शरीर में पहà¥à¤‚चाया जाता है. इसी के जरिठदवा की जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मातà¥à¤°à¤¾ à¤à¥€ दी जा सकती है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि खून का बहाव तेज होता है. इससे मरीज को दवा का असर तà¥à¤°à¤‚त नहीं होगा और उसे शॉक नहीं लगेगा. दवा की डोज के हिसाब से मांसपेशियों की जगह को चà¥à¤¨à¤¤à¥‡ हैं. इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ इंजेकà¥à¤¶à¤¨ को बाजà¥à¤“ं के अलावा, हिप या जांघों पर दिया जाता है जहां मांसपेशियां जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती हैं.
सबकà¥à¤¯à¥‚टेनियस इंजेकà¥à¤¶à¤¨ (Subcutaneous injections)
इस इंजेकà¥à¤¶à¤¨ को सà¥à¤•िन की सबसे आखिरी लेयर में लगाया जाता है. इसका पà¥à¤°à¤®à¥à¤– उदाहरण है डायबिटीज के मरीज को इंसà¥à¤¯à¥à¤²à¤¿à¤¨ देना. इन इंजेकà¥à¤¶à¤¨à¥à¤¸ के लिठलंबी नीडल की जरूरत नहीं पड़ती है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ कि इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सिरà¥à¤« इनर सà¥à¤•िन लेयर के फैटी टिशू को पार करना होता है. ये इंजेकà¥à¤¶à¤¨ दवा के छोटे à¤à¤¾à¤— को देने में मदद करते हैं, जैसे महज हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨ की कà¥à¤› बूंदें. सबकà¥à¤¯à¥‚टेनियस टिशू में में धमनियां जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नहीं होती हैं. इस कारण इनमें इंजेकà¥à¤¶à¤¨ लगाने से हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨ बेहद धीमी और सà¥à¤¥à¤¿à¤° गति से शरीर में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करते हैं. इसे खून में इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨ का लेवल धीरे-धीरे मैनेज होता है. डायबिटीज के मरीज आमतौर पर इंसà¥à¤¯à¥à¤²à¤¿à¤¨ पेन को अपनी कमर में लगाते हैं. इस दौरान वो सà¥à¤•िन को पिंच करते हैं जिससे फैटी टिशू और मांसपेशियां à¤à¤• दूसरे से अलग हो जाà¤à¤‚.
इंटà¥à¤°à¤¾à¤¡à¤°à¥à¤®à¤² इंजेकà¥à¤¶à¤¨ (Intradermal injections)
ये इंजेकà¥à¤¶à¤¨ सà¥à¤•िन की दूसरी या बीच की लेयर में दिठजाते हैं जिसे डरà¥à¤®à¤¿à¤¸ के नाम से जाना जाता है. ये इंजेकà¥à¤¶à¤¨ दवाà¤à¤‚ या सपà¥à¤²à¤¿à¤®à¥‡à¤‚ट पà¥à¤¹à¤‚चाने के लिठनहीं इंजेकà¥à¤Ÿ किठजाते हैं. इनकी नीडल 1 इंच से छोटी होती है और ये शरीर को कà¥à¤› ही हद तक चीरते हैं. टीबी के टेसà¥à¤Ÿ के दौरान इस तरह की सूई लगाई जाती है. ये इंजेकà¥à¤¶à¤¨ फोरआरà¥à¤® में लगाठजाते हैं, यानी कलाई से लेकर कोहनी के बीच में. इनसे इंजेकà¥à¤Ÿ किठजाने वाले पदारà¥à¤¥, जैसे à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥‡à¤¨ या टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤¯à¥‚लिन पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ को डालकर देखा जाता है कि शरीर में कोई रैश या रेड पैच तो नहीं हो गया. इससे पता चलता है कि शरीर à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥‡à¤¨ से कैसे रिà¤à¤•à¥à¤Ÿ करता है.
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